shadi .

शादी मे आप सभी आना।
देना भेट मे किताभ वो याद से लाना।

हर काज़ी  का रहे खामोश बहाना।
बिना किताभ भेट दिये उसे  शादी रहे सपना।

खामोश हमारा इरादा पुस्तकालय खड़ा करना ये शादी का बहाना।
ये ही सोच से भारत के हर नागरिक ने ज़रुरु नहाना।

शादी याने अपने बच्चे, सदन।
ये सोच हर बदन।
आओ ,
शादी याने पुस्तकालय , किताब
ये सोच हमारी शादी से बनाते है हमारे वतन। 

दहेज़ मे बांधे हम पुस्तकलय ससुराल मै।
और मायके मै बाटे किताब।
यही शादी का बने असली  हिसाब। 


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