BHrAm
भ्रम है ये भ्रम
की तू स्त्री और मै पुरुष।
हम है इन्सान
वही
सर्व श्रेष्ठ है धर्म।
दो आँखें, दो हाथ, दो पाँव
तो क्यों करे स्त्री-पुरुष में भेदभाव।
भ्रम है ये भ्रम।
ईश्वर-अल्लाह की जन्नत की जमीन।
तो क्यों बनाएँ भेदभाव
स्त्री - पुरुष में
और बनाए इसे जहन्नुम की जमीन।
जगत, दुनिया की उत्पत्ति के लिए
दोनों की जरूरत लगे समान।
तो क्यों न हम बँटवारा काम, नाम, दाम का उखाड़ के,
दोनों का करे सम्मान ।
आसमान में न भेदभाव ।
जमीन भी न करे
औरत -पुरुष की जली चिता
रखने में भेदभाव ।
तो भ्रम है यह भेदभाव
भ्रम है यह भ्रम ।
की तू स्त्री और मै पुरुष।
हम है इन्सान
वही
सर्व श्रेष्ठ है धर्म।
दो आँखें, दो हाथ, दो पाँव
तो क्यों करे स्त्री-पुरुष में भेदभाव।
भ्रम है ये भ्रम।
ईश्वर-अल्लाह की जन्नत की जमीन।
तो क्यों बनाएँ भेदभाव
स्त्री - पुरुष में
और बनाए इसे जहन्नुम की जमीन।
जगत, दुनिया की उत्पत्ति के लिए
दोनों की जरूरत लगे समान।
तो क्यों न हम बँटवारा काम, नाम, दाम का उखाड़ के,
दोनों का करे सम्मान ।
आसमान में न भेदभाव ।
जमीन भी न करे
औरत -पुरुष की जली चिता
रखने में भेदभाव ।
तो भ्रम है यह भेदभाव
भ्रम है यह भ्रम ।
Comments
Post a Comment