Posts

Showing posts from November, 2016

BHrAm

भ्रम है ये भ्रम की तू स्त्री और मै पुरुष। हम है इन्सान वही सर्व श्रेष्ठ है धर्म।  दो आँखें, दो हाथ, दो पाँव तो क्यों करे स्त्री-पुरुष में भेदभाव। भ्रम है ये भ्रम। ईश्वर-अल्लाह की जन्नत की जमीन। तो क्यों बनाएँ  भेदभाव स्त्री - पुरुष में और बनाए इसे जहन्नुम की जमीन। जगत, दुनिया की उत्पत्ति के लिए दोनों की जरूरत लगे समान। तो क्यों न हम बँटवारा काम, नाम, दाम का उखाड़ के, दोनों का करे सम्मान । आसमान में न भेदभाव । जमीन भी न करे औरत -पुरुष की जली चिता रखने में भेदभाव । तो भ्रम है यह भेदभाव भ्रम है यह भ्रम ।