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Showing posts from April, 2017

शायरी।।

इन्सान आझ मुबारक है ,तो कल्ह मकबरे मै। तो घुस्सा भी बंध रखो कलमारी मे अगर इन्सान कल्ह मकबरे मे हे।

शायरी।

फुल खिलने को वक्त दो मक्खी को शेहेध चकने का समय दो। और जभ शेहेद खतम हो जाये तो कुदरत को तैर करने दो।